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देहरादून: उत्तराखंड में खनिज परिवहन से जुड़े वाहन स्वामियों को ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने के कारण होने वाली परेशानी से राहत देने के लिए भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय ने नई पहल शुरू की है। अब यातायात जाम, नो-एंट्री, वीआईपी मूवमेंट, वाहन खराब होने या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों के कारण ई-रवन्ना की वैधता अवधि समाप्त होने की स्थिति में वाहन स्वामी तत्काल इसकी सूचना विभाग को दे सकेंगे। इसके लिए निदेशालय की ओर से दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

 

08 अक्टूबर 2026 को भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, उत्तराखंड में MDTSS योजना के अंतर्गत कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म श्री राजपाल लेघा ने की। समीक्षा के दौरान खनिज वाहन स्वामियों की सुविधा, ई-रवन्ना व्यवस्था और उसकी वैधता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। इसी दौरान ई-रवन्ना की अवधि खत्म होने के कारण वाहन स्वामियों को होने वाली परेशानी के समाधान के लिए नई हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया गया।

 

दरअसल, खनिज परिवहन में ई-रवन्ना एक महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज है। इसके माध्यम से खनिज के परिवहन से जुड़ी जानकारी दर्ज रहती है और वाहन के आवागमन की निगरानी की जाती है। कई बार वाहन स्वामी की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं होने के बावजूद रास्ते में अचानक ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जिनकी वजह से वाहन निर्धारित समय में अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाता।

 

यातायात जाम, निर्धारित मार्ग पर नो-एंट्री, वीआईपी मूवमेंट, सड़क बाधित होने या वाहन में तकनीकी खराबी जैसी परिस्थितियों में वाहन लंबे समय तक एक ही स्थान पर खड़ा रह सकता है। ऐसे में ई-रवन्ना की निर्धारित वैधता अवधि समाप्त हो जाती है। इसके बाद वाहन की जांच के दौरान ई-रवन्ना की वैधता समाप्त मिलने पर ई-चालान की कार्रवाई हो सकती है। इससे वाहन स्वामियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

अब इस समस्या के समाधान के लिए खनिज वाहन स्वामी 8192802345 और 8192802320 नंबरों पर व्हाट्सऐप के माध्यम से तत्काल सूचना दे सकते हैं।

 

विभाग की ओर से जारी व्यवस्था के तहत यदि किसी आकस्मिक परिस्थिति के कारण ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने की आशंका है या हो चुकी है, तो वाहन स्वामी को वाहन की नंबर प्लेट की स्पष्ट फोटो और वाहन के GPS Coordinates यानी वर्तमान लोकेशन हेल्पलाइन नंबर पर व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजनी होगी। इससे विभाग के पास संबंधित वाहन की स्थिति की तत्काल जानकारी दर्ज हो सकेगी।

 

इस व्यवस्था का उद्देश्य खनिज वाहन स्वामियों को अनावश्यक ई-चालान की स्थिति से बचाने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। खास तौर पर उन मामलों में, जहां ई-रवन्ना की वैधता खत्म होने के पीछे वाहन स्वामी की कोई गलती नहीं है, तत्काल सूचना दर्ज कराने से संबंधित परिस्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

 

निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों हेल्पलाइन नंबरों का इस्तेमाल केवल ई-रवन्ना से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं रहेगा। अवैध खनन, अवैध परिवहन, अवैध भंडारण या खनन से संबंधित किसी भी गतिविधि की शिकायत अथवा सूचना भी इन्हीं हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से दी जा सकती है।

 

इस पहल को खनन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी और जनसुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हेल्पलाइन के माध्यम से एक ओर जहां वाहन स्वामियों को आकस्मिक परिस्थितियों में अपनी स्थिति तत्काल दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन और खनिज परिवहन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी विभाग तक तेजी से पहुंच सकेगी।

 

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय का कहना है कि नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य जनसुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि खनिज परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संचालित हो सके।


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