2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान की गधे-घोड़ों वाली टिप्पणी पर विवाद। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दी सोच-समझकर बयान देने की नसीहत, तो हरक सिंह रावत ने भाजपा की राजनीतिक रणनीति पर उठाए सवाल।
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान का एक बयान पार्टी के लिए चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका दिया, बल्कि पार्टी के भीतर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया, जब धामी सरकार के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अपने ही दल के मीडिया प्रभारी को सार्वजनिक रूप से सोच-समझकर बयान देने की नसीहत दे दी। अब सवाल उठ रहा है कि जिस पार्टी ने दूसरे दलों से आए नेताओं को संगठन और सरकार में अहम जिम्मेदारियां दी हैं, उसके लिए इस तरह की टिप्पणी राजनीतिक असहजता का कारण क्यों बन रही है?
बीजेपी प्रवक्ता मनवीर चौहान की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के राजनीतिक बदलाव पर तंज कसा। चौहान ने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए जो नेता गधे-घोड़ों की श्रेणी में थे, वे भाजपा में आने के बाद बेहतर विचारधारा वाले बन गए।
उनकी इस टिप्पणी को कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। बयान सामने आते ही कांग्रेस ने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में शामिल हुए मथुरा दत्त जोशी से ही पूछ लिया जाना चाहिए कि इस टिप्पणी के हिसाब से वे किस श्रेणी में आते हैं।
गोदियाल का यह पलटवार इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि मथुरा दत्त जोशी लंबे समय तक कांग्रेस में संगठनात्मक भूमिका निभाने के बाद जनवरी 2025 में भाजपा में शामिल हुए थे। ऐसे में मनवीर चौहान की टिप्पणी को कांग्रेस ने भाजपा में आए नेताओं के सम्मान से जोड़कर सवाल उठाए।
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी का पलटवार, बहुगुणा की नसीहत
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को जवाब दिया। उन्होंने गोदियाल को कांग्रेस के भीतर झांकने की नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा में निष्ठावान और काम करने वाले लोग हैं। इस बयान से साफ हुआ कि मामला केवल विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम प्रतिक्रिया कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा की रही। बहुगुणा ने मनवीर चौहान को जिम्मेदार पद पर रहते हुए सोच-समझकर बयान देने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को विवादित टिप्पणियों से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के इस आंतरिक मामले का संज्ञान प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लेंगे।
बहुगुणा की इस प्रतिक्रिया ने विवाद को नई दिशा दे दी। विपक्ष के हमलों के बीच अब भाजपा के भीतर से भी बयानबाजी पर संयम बरतने की जरूरत सामने आई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मनवीर चौहान की टिप्पणी ने पार्टी के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है।
भाजपा में कांग्रेस से आए नेताओं की लंबी सूची
मनवीर चौहान के बयान के बाद भाजपा में शामिल हुए नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। वर्ष 2014 में सतपाल महाराज कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद वर्ष 2016 में कांग्रेस के भीतर बड़ी टूट हुई और कई नेता भाजपा में चले गए। सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा और रेखा आर्य जैसे नेताओं ने भी कांग्रेस से अलग होकर भाजपा का दामन थामा।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी वर्ष 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उनके बेटे और वर्तमान कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा स्वयं कांग्रेस से भाजपा में नहीं आए हैं। वहीं, भाजपा में शामिल होने वाले दूसरे नेताओं ने समय के साथ संगठन और सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं।
इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच मनवीर चौहान की टिप्पणी ने पार्टी की उस रणनीति पर बहस छेड़ दी है, जिसके तहत भाजपा ने दूसरे दलों से आए नेताओं को अपने साथ जोड़ा और उन्हें राजनीतिक अवसर दिए।
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भाजपा को घेरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने भी इस विवाद को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा मनवीर चौहान की टिप्पणी को गंभीरता से लेती, तो कांग्रेस से आए नेताओं को टिकट नहीं देती। हरक सिंह रावत ने वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए मनवीर चौहान की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा में कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले नेताओं की बड़ी संख्या है।
हालांकि, हरक सिंह रावत की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक आरोप के तौर पर देखी जानी चाहिए। लेकिन उनके बयान ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
2027 से पहले भाजपा के सामने संतुलन की चुनौती
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ राजनीतिक तैयारियों में जुटी है। ऐसे समय में पार्टी के मीडिया प्रभारी की टिप्पणी, कैबिनेट मंत्री की नसीहत और कांग्रेस के पलटवार ने एक नया राजनीतिक विमर्श खड़ा कर दिया है।
अब भाजपा के सामने चुनौती केवल इस विवाद पर प्रतिक्रिया देने की नहीं, बल्कि अपने पुराने कार्यकर्ताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं के बीच संतुलन का संदेश देने की भी है। मनवीर चौहान के बयान से शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर की गई टिप्पणी ने चुनाव से पहले पार्टी के भीतर और बाहर नई बहस को जन्म दे दिया है।
