देहरादून। पहाड़ों की ठंडी हवाओं में तैनात एक साहब इन दिनों कुछ ज्यादा ही ‘गरम’ नजर आ रहे हैं। वजह मौसम नहीं, बल्कि उनकी वह पुरजोर कोशिश है जिसके जरिए वे किसी तरह मैदानी जिले में अपनी अगली पारी खेलना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो साहब की नजर देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे ‘रन बनाने वाले’ जिलों पर टिकी हुई है।
बताया जा रहा है कि साहब पहले भी एक महत्वपूर्ण जिले में अहम पद संभाल चुके हैं और अब उसी स्तर की कुर्सी पर दोबारा विराजमान होने का सपना देख रहे हैं। फर्क बस इतना है कि इस बार उनका लक्ष्य पहाड़ नहीं, बल्कि मैदान है—जहां ‘काम’ भी आसान और ‘नाम’ भी ज्यादा मिलता है।
साहब की कोशिशों की फेहरिस्त भी कम दिलचस्प नहीं है। कभी बड़े साहबों के दरबार में हाजिरी, तो कभी बड़े नामों से नजदीकियां बढ़ाने की कवायद—हर पैंतरा आजमाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि साहब ने ‘नेटवर्किंग’ का ऐसा जाल बिछाया है कि अब खुद मकड़ी भी शर्मा जाए।
फिलहाल साहब की निगाहें ‘बड़े दरबार’ की तरफ टिकी हैं, जहां से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। माना जा रहा है कि जैसे ही इशारा मिलेगा, साहब पहाड़ की ठंडी वादियों को अलविदा कहकर मैदान में आस्तीन चढ़ाकर उतरने को तैयार हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि साहब की यह ‘पोस्टिंग यात्रा’ कब पूरी होती है और कब वे पहाड़ से उतरकर मैदान में अपना नया ‘मैच’ शुरू करते हैं। तब तक पहाड़ की वादियां भी शायद यही सोच रही होंगी—“कौन कहता है यहां ठंड है, साहब के दिल में तो आग लगी है!”
