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देहरादून/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बारिश के बीच बादल फटने की घटना ने व्यापक तबाही मचा दी। जिले के दूरस्थ नीति घाटी क्षेत्र में उफनाई नदी ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि घाटी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल बह गया। पुल बहने से क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे स्थानीय लोगों और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण क्षेत्र की नदी अचानक उफान पर आ गई। देखते ही देखते जलस्तर तेजी से बढ़ा और तेज बहाव में पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। कुछ ही देर में पूरा पुल नदी में समा गया। यह पुल नीति घाटी के गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने का प्रमुख साधन था, जिसके टूटने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि रात के समय अचानक तेज गर्जना और पानी के बढ़ते बहाव की आवाज सुनाई दी। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए पुल को बहा दिया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। कई गांवों के लोग अब मुख्य सड़क से कट गए हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, तत्काल राहत और बचाव टीमों को मौके के लिए रवाना किया गया। हालांकि खराब मौसम और मार्ग बाधित होने के कारण टीमों को पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों के किनारे न जाने की अपील की है। साथ ही, आपदा प्रबंधन की टीमें संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का यह भी कहना है कि जल्द ही अस्थायी पुल या वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा, ताकि प्रभावित गांवों को राहत मिल सके।

उधर, मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्र में राहत पहुंचाने और संपर्क बहाल करने की है।


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