देहरादून। पिछले करीब छह महीने से उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को बदले जाने की चर्चाएं लगातार राजनीतिक गलियारों में सुनाई देती रही हैं। कभी संगठन में बदलाव की बात सामने आती है तो कभी नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों को लेकर कयास लगाए जाते हैं। लेकिन इन तमाम चर्चाओं के बीच महेंद्र भट्ट ने अपने नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है, जो उत्तराखंड बीजेपी की संगठनात्मक राजनीति में खास महत्व रखता है।
31 जुलाई 2022 को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले महेंद्र भट्ट का कार्यकाल अब चार साल 16 दिन का हो गया है। इसके साथ ही वह उत्तराखंड बीजेपी के सबसे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहने वाले नेता बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड सांसद अजय भट्ट के नाम था, जिनका प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल चार साल 15 दिन रहा था।
महेंद्र भट्ट की सबसे बड़ी पहचान मंचीय आक्रामकता से ज्यादा संगठन को सहज तरीके से चलाने वाले नेता की रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी उपलब्धता और संवाद की शैली को उनकी प्रमुख ताकत माना जाता है। आम कार्यकर्ता के लिए उनसे मिलना और अपनी बात रखना अपेक्षाकृत आसान रहा है। अध्यक्ष पद की औपचारिकता के बावजूद उनके व्यवहार में एक सहजता दिखाई देती है, जिसने संगठन के निचले स्तर तक उनकी स्वीकार्यता बढ़ाई है।
चुनावी प्रदर्शन की बात करें तो भट्ट के कार्यकाल में बीजेपी का संगठन कई मोर्चों पर मजबूत दिखाई दिया। 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए विभिन्न चुनावों में पार्टी ने अपनी पकड़ बनाए रखी। हरिद्वार पंचायत चुनाव इसका एक बड़ा उदाहरण रहा, जहां बीजेपी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ-साथ सभी छह ब्लॉकों में प्रमुख, ज्येष्ठ प्रमुख और कनिष्ठ प्रमुख के पदों पर भी कब्जा जमाया।
इसी दौरान कांग्रेस के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और नेताओं के दल बदलने का सिलसिला भी देखने को मिला। कांग्रेस के कई बड़े चेहरे बीजेपी में शामिल हुए, जिससे विपक्षी दल के सामने कई क्षेत्रों में राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हुईं। हालांकि इन उपलब्धियों का पूरा श्रेय केवल प्रदेश अध्यक्ष को देना उचित नहीं होगा, क्योंकि चुनावी सफलता में सरकार, संगठन, स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की सामूहिक भूमिका होती है।
भट्ट की एक और खासियत यह रही कि वे संगठन के भीतर बड़े गुटीय विवादों के केंद्र में कम ही दिखाई दिए। उत्तराखंड बीजेपी में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल हमेशा महत्वपूर्ण रहा है और भट्ट इस मामले में अपेक्षाकृत विवादों से दूर रहे हैं।
उनकी सोशल मीडिया सक्रियता भी चर्चा में रहती है। महेंद्र भट्ट कई बार खुद सोशल मीडिया पोस्ट लिखते हैं, कमेंट पढ़ते हैं और जवाब भी देते हैं। आज के दौर में जब अधिकांश नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट टीम संभालती है, ऐसे में यह उनकी व्यक्तिगत शैली को दर्शाता है। हालांकि कमेंट सेक्शन में सिर्फ तारीफ नहीं होती, बल्कि राजनीतिक तंज और आलोचना भी खूब देखने को मिलती है।
इसलिए महेंद्र भट्ट का चार साल 16 दिन का कार्यकाल सिर्फ एक संगठनात्मक रिकॉर्ड नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि राजनीति में सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला नेता ही हमेशा सबसे प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं। सादगी, कार्यकर्ताओं तक पहुंच और संगठन को शांत तरीके से चलाने की क्षमता भी किसी प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी ताकत हो सकती है।
अब सवाल यह है कि रिकॉर्ड बनाने के बाद बीजेपी महेंद्र भट्ट को आगे भी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी में बनाए रखती है या संगठन में बदलाव की चर्चाएं आखिरकार हकीकत बनती हैं। आने वाला समय बताएगा कि यह रिकॉर्ड उनके कार्यकाल का पड़ाव है या किसी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत।
