देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता को लेकर चल रही प्रक्रिया का आज अंतिम दिन है। प्रदेश में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत रहे मदरसों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता लेने के लिए 30 सितंबर 2026 तक आवेदन करने का समय दिया गया था। इसके बाद बिना मान्यता संचालित पाए जाने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
उत्तराखंड में 30 जून 2026 को मदरसा बोर्ड का कार्यकाल समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद 1 जुलाई से मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू हुई। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में पहले से पंजीकृत 452 मदरसों को नए नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त करना जरूरी है।
452 मदरसों की मान्यता का मामला अभी भी लंबित
मान्यता प्रक्रिया को लेकर उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक 452 मदरसों में से बड़ी संख्या अभी भी शिक्षा विभाग से औपचारिक मान्यता का इंतजार कर रही है। 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 419 मदरसों को अब तक शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं मिल सकी थी। वहीं दूसरी ओर कुछ मदरसों ने आवेदन किया है, कुछ को मान्यता मिल चुकी है और कई मदरसे बंद भी हो चुके हैं।
इससे पहले सितंबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक करीब 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था और 35 मदरसों को मान्यता दिए जाने की बात सामने आई थी। अलग-अलग चरणों में बंद और सील किए गए मदरसों की संख्या भी बढ़ी है।
बिना मान्यता संचालित हुए तो होगी कार्रवाई
सरकार और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों के तहत मान्यता के बिना किसी शिक्षण संस्थान का संचालन नहीं किया जा सकता। ऐसे में 30 सितंबर के बाद भी यदि कोई मदरसा बिना आवश्यक मान्यता के संचालित पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पहले ही कई जिलों में बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून में कई मदरसों को सील किया गया है। कुछ संस्थानों ने स्वयं भी बंद करने की सूचना प्रशासन को दी है।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी तैयारी
सरकार की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू मदरसों में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है। यदि कोई मदरसा मान्यता हासिल नहीं कर पाता और उसे बंद करना पड़ता है तो वहां पढ़ने वाले बच्चों को नजदीकी मान्यता प्राप्त स्कूल या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान में दाखिला दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान पर कार्रवाई का असर बच्चों की पढ़ाई पर न पड़े।
वहीं, मान्यता के लिए आवेदन करने वाले संस्थानों की विभिन्न मानकों पर जांच की जा रही है। इनमें संस्थान से जुड़े दस्तावेज, भूमि और भवन संबंधी रिकॉर्ड तथा शिक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का परीक्षण शामिल है। नियमों के अनुरूप पाए जाने वाले संस्थानों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद मान्यता दिए जाने की व्यवस्था है।
अब 30 सितंबर की समयसीमा खत्म होने के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है कि 452 मदरसों में से कितने संस्थान नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल कर पाए और कितने संस्थानों के खिलाफ आगे कार्रवाई की स्थिति बनती है। फिलहाल आज का दिन उन मदरसों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नई व्यवस्था के तहत अपनी मान्यता की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं।
