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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़ा विवाद चर्चा में आ गया है। जैनी ने एक बार फिर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने की मांग की है। देहरादून पहुंचीं जैनी ने भावुक होते हुए कहा कि जब तक उन्हें और उनके बेटे को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक वह देहरादून से वापस नहीं जाएंगी।

जैनी का आरोप है कि जब वह महज 16 साल की थीं, तब उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में हरक सिंह रावत की भूमिका रही है। जैनी के मुताबिक, उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक बार मधुबन होटल, एक बार मसूरी और एक बार हॉस्टल ले जाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वह करीब दो महीने तक यमुना कॉलोनी में रही थीं।

जैनी ने कहा कि उस समय उनकी उम्र महज 16 साल थी और वह नाबालिग थीं। उन्हें उस वक्त कई बातों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भी उनके साथ अन्याय हुआ और उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि उस समय उनसे किन-किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे।

जैनी ने वर्ष 2016 की एक कथित घटना का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि उस दौरान हरक सिंह रावत ने उन्हें ग्रीन पार्क स्थित अपने आवास पर बुलाया था और वहां भी उनके साथ दुष्कर्म किया गया। हालांकि, ये सभी आरोप जैनी की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के जरिए ही सच्चाई सामने आ सकती है।

इस पूरे मामले में जैनी की सबसे बड़ी मांग अपने बेटे को पिता का नाम और उसका अधिकार दिलाने की है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अब 23 साल का हो चुका है और बिना पिता के नाम के जीवन बिता रहा है। जैनी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक कई परिस्थितियों को देखते हुए चुप्पी साधे रखी, लेकिन अब वह अपने बेटे के भविष्य और अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।

उन्होंने कहा, “मैंने उनकी पत्नी का चेहरा देखकर आज तक बहुत कुछ नहीं कहा, लेकिन अब मुझे अपने बेटे को उसके पिता का नाम चाहिए। मेरे बेटे को उसका हक मिलना चाहिए।”

जैनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी न्याय की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री ने इस मामले में उनका नाम लिया तो उन्हें लगा कि शायद अब उन्हें भी न्याय मिल सकता है। इसी उम्मीद के साथ वह देहरादून पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानतीं और न ही कभी उनसे मिली हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी बात सुनेगी।

महेंद्र भट्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर जैनी ने कहा कि वह नहीं जानतीं कि महेंद्र भट्ट कौन हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में उनका हरक सिंह रावत से कोई संपर्क नहीं है।

जैनी ने दो टूक कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराई जाए और उन्हें न्याय मिले। उन्होंने कहा कि 16 साल की उम्र में उनके साथ जो कुछ हुआ, उसका जवाब आज तक नहीं मिला है। अब वह चुप रहने वाली नहीं हैं।

जैनी के इन आरोपों के बाद एक बार फिर पुराने मामले की निष्पक्ष जांच और उनके बेटे के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां उनकी दोबारा जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती हैं और संबंधित पक्ष इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।*


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