संसद परिसर में हुए विवादित प्रदर्शन को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सांसद पप्पू यादव पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों का वेश धारण कर विरोध प्रदर्शन करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सनातन परंपरा और संत समाज का खुला अपमान है। मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की मानसिकता समाज को बांटने का काम करती है।
मंगलवार को हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “पप्पू यादव और उनके साथियों ने जिस प्रकार साधु-संतों का छद्म वेश धारण कर विरोध प्रदर्शन किया, उससे अधिक निकृष्ट कार्य कोई नहीं हो सकता।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड की पहचान धर्म, आध्यात्म और संत परंपरा से है और यहां संत समाज का सम्मान सर्वोपरि है।
सीएम धामी ने आगे कहा कि संत समाज ने हमेशा देश और समाज को दिशा देने का कार्य किया है, ऐसे में उनका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस मुद्दे को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया गया, उसमें किसी संत या साधु का नाम तक सामने नहीं आया, फिर भी संत समाज की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री ने पप्पू यादव और उनके सहयोगियों पर सनातन धर्म का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनकी सोच और मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि “ऐसे लोग लगातार सनातन धर्म को बदनाम करने और संतों का अपमान करने का काम कर रहे हैं।”
इस पूरे मामले को लेकर हरिद्वार समेत कई स्थानों पर संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। संतों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए देशभर में इसके विरोध का ऐलान भी किया है। धार्मिक संगठनों का कहना है कि संसद जैसे गरिमामय स्थान पर इस तरह का प्रदर्शन बेहद आपत्तिजनक है और इससे करोड़ों लोगों की आस्था आहत हुई है।
गौरतलब है कि हाल ही में संसद परिसर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा धार्मिक प्रतीकों और वेशभूषा का इस्तेमाल किया गया था, जिस पर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस घटना के बाद से ही विभिन्न धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मुख्यमंत्री धामी ने अंत में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में संतों और सनातन संस्कृति का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और समाज को ऐसे कृत्यों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
