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देहरादून में बदलते मौसम और अनियमित बारिश के चलते डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने संभावित स्थिति को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए 40 सरकारी और निजी अस्पतालों में कुल 1662 बेड आरक्षित किए गए हैं, ताकि संक्रमण बढ़ने की स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

 

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी उमस भरी गर्मी का माहौल बन रहा है, जो मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रहा है। इसी कारण डेंगू के मामलों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखते हुए आवश्यक दवाइयों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। अस्पतालों में अलग वार्ड बनाए गए हैं, जहां डेंगू के मरीजों का इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही प्लेटलेट्स की उपलब्धता बनाए रखने के लिए ब्लड बैंकों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मिलकर शहर में लगातार फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव कर रही हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

 

स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को डेंगू के लक्षणों—जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और प्लेटलेट्स में गिरावट—के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि समय रहते जांच और इलाज कराया जा सके।

 

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को डेंगू जैसे लक्षण दिखाई दें तो वह तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराए और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करे। समय पर इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

 

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता संक्रमण को फैलने से रोकना और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।

 

बदलते मौसम के इस दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि नागरिक सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें, तो डेंगू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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