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देहरादून में हाल ही में तैयार किए गए एक पुल की एप्रोच रोड महज 16 दिनों के भीतर धंस जाने का मामला सामने आया है, जिसने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद शासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

 

जानकारी के अनुसार, संबंधित पुल और उसकी एप्रोच रोड का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था और इसे जनता के उपयोग के लिए खोला गया था। लेकिन बेहद कम समय में सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे आवागमन बाधित हो गया और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, अन्यथा जान-माल का नुकसान हो सकता था।

 

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। लोगों का कहना है कि सड़क के किनारों पर पहले से ही दरारें दिखने लगी थीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया। अब सड़क के धंसने के बाद क्षेत्र में आवागमन को लेकर समस्या और बढ़ गई है।

 

घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि निर्माण में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी बात कही गई है।

 

PWD के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके का निरीक्षण कर तकनीकी रिपोर्ट तैयार करें और यह स्पष्ट करें कि एप्रोच रोड धंसने के पीछे क्या कारण रहे। प्रारंभिक तौर पर बारिश, जल निकासी की खराब व्यवस्था और निर्माण में कमी जैसे कारणों की आशंका जताई जा रही है।

 

इस घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल या सड़क निर्माण में गुणवत्ता और निगरानी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया जाता, तो इस तरह की घटनाएं सामने आना तय है।

 

शासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, सभी चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा करने के संकेत दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही को समय रहते रोका जा सके।

 

फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित हिस्से को बैरिकेड कर दिया है और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जा रही है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।


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