देहरादून: उत्तराखंड के खेल विभाग की डिजिटल व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। विभाग के पोर्टल और मोबाइल एप के निर्माण एवं संचालन का जिम्मा संभाल रही निजी एजेंसी पर आरोप है कि उसने बिना अनुमति वेबसाइट और डिजिटल सिस्टम का एक्सेस बंद कर दिया। इसके चलते खेल विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन प्रभावित होने की बात सामने आई है। मामले में विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच शुरू हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, खेल विभाग की वेबसाइट और एप तैयार करने तथा उसके संचालन की जिम्मेदारी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को निविदा की शर्तों के तहत दी गई थी। एजेंसी के पास विभाग के पोर्टल और एप को संचालित करने के लिए जरूरी लॉगिन क्रेडेंशियल और तकनीकी एक्सेस मौजूद थे।
आरोप है कि एजेंसी की ओर से विभाग को पूर्व सूचना दिए बिना वेबसाइट के क्रेडेंशियल और एक्सेस में बदलाव कर दिया गया। इसके बाद विभाग के अधिकारी अपने ही डिजिटल सिस्टम तक पूरी तरह पहुंच नहीं बना पा रहे हैं। इससे विभाग की ऑनलाइन सेवाओं और विभिन्न योजनाओं से जुड़े कामकाज पर असर पड़ा है।
सबसे ज्यादा प्रभाव जिन योजनाओं पर पड़ने की बात कही जा रही है, उनमें मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी, उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और डिजिटल यूथ फेस्टिवल शामिल हैं। इन योजनाओं से खिलाड़ियों और युवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण डाटा डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाता है। ऐसे में वेबसाइट और पोर्टल का एक्सेस बाधित होने से आवेदन, डाटा प्रबंधन और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं में तकनीकी परेशानी सामने आने की आशंका है।
मामले को गंभीर बनाते हुए खेल विभाग के आईटी सेल के नोडल अधिकारी आदर्श पंत की ओर से रायपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। शिकायत में संबंधित निजी एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशुल बगई का नाम भी सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभाग की अनुमति या पूर्व सहमति के बिना डिजिटल प्लेटफॉर्म का एक्सेस बंद किया गया।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू विभागीय योजनाओं से जुड़े डाटा की सुरक्षा से भी जुड़ा है। शिकायत के बाद यह जांच का विषय बन गया है कि पोर्टल पर मौजूद खिलाड़ियों और अन्य लाभार्थियों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। रिपोर्ट में लाखों बच्चों से जुड़े डाटा के प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, डाटा चोरी या उसके दुरुपयोग की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रायपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि एजेंसी को पोर्टल और एप का एक्सेस किन शर्तों के तहत दिया गया था और क्या अनुबंध के अनुसार उसे किसी स्थिति में एक्सेस बंद करने या उसमें बदलाव करने का अधिकार था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि एक्सेस वास्तव में बिना अनुमति और जानबूझकर बंद किया गया या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारण था।
फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। हालांकि, सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए निजी एजेंसी पर निर्भर डिजिटल सिस्टम और विभागीय डेटा की सुरक्षा को लेकर इस घटनाक्रम ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
