मोदी-धामी की डबल इंजन केमिस्ट्री से बदला सीमांत का परिदृश्य, आदि कैलाश बना आस्था का नया केंद्र दो माह में 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए आदि कैलाश-ओम पर्वत के दर्शन
हिमालय की गोद में स्थित आदि कैलाश आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में तेजी से उभर रहा है। कभी यह यात्रा सीमित संसाधनों और कठिन मार्गों के कारण केवल चुनिंदा श्रद्धालुओं तक सिमटी हुई थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। सीमांत उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है और इसका प्रभाव आँकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में जहाँ 36,456 श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए थे, वहीं वर्ष 2026 में केवल दो महीनों के भीतर ही यह संख्या 52,250 के पार पहुँच चुकी है। यह वृद्धि न केवल श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था को दर्शाती है, बल्कि सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों की सफलता का भी प्रमाण है। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे योजनाबद्ध प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति रही है।
इस बदलाव की नींव वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक आदि कैलाश दौरे से पड़ी, जब उन्होंने इस आध्यात्मिक स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आमंत्रण पर हुए इस दौरे के बाद राज्य सरकार ने क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। सड़क निर्माण, बेहतर कनेक्टिविटी, ऑनलाइन इनर लाइन परमिट व्यवस्था, गेस्ट हाउस और होमस्टे जैसी सुविधाओं के विकास ने यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित बना दिया है।
आज देशभर से आने वाले श्रद्धालु न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक वातावरण से प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाओं की भी सराहना कर रहे हैं। बेहतर सड़कें, सुचारू परिवहन व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आवासीय विकल्पों ने इस यात्रा को आम श्रद्धालु के लिए सुलभ बना दिया है। यही कारण है कि हर साल यहाँ आने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है।
इस बढ़ते धार्मिक पर्यटन का सकारात्मक प्रभाव सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। पिछले तीन वर्षों में 284 नए टैक्सी वाहन पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 93 कैम्पर और 191 मैक्स वाहन शामिल हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। धारचूला से आदि कैलाश और ओम पर्वत मार्ग पर बसे लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका अब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस यात्रा से जुड़ गई है।
इसके साथ ही रिवर्स पलायन की तस्वीर भी बदल रही है। बूँदी, कुटी, गुंजी, नाबी और नपल्च्यू जैसे गाँव, जो कभी खाली होते जा रहे थे, अब फिर से आबाद होने लगे हैं। लगभग 70 से 80 स्थानीय परिवारों ने अपने घरों का पुनर्निर्माण कर उन्हें होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराया है। वर्ष 2026 में अब तक 47 नए होमस्टे जुड़ चुके हैं, जबकि 827 पहले से संचालित हैं। इससे स्थानीय लोगों को अपने ही गाँव में सम्मानजनक स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। धारचूला से आदि कैलाश तक लगभग 115 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण किया गया है और इस मार्ग पर 10 नए पुल बनाए गए हैं। इससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन गई है।
कुल मिलाकर, आदि कैलाश आज केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में विकास, पर्यटन और रिवर्स पलायन का सफल मॉडल बनकर उभरा है। जिस स्थान पर कभी कुछ हजार श्रद्धालुओं का पहुँचना बड़ी उपलब्धि माना जाता था, वहीं अब केवल दो महीनों में ही 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन इस बात का संकेत है कि यह दिव्य धाम राष्ट्रीय आस्था के मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान बना चुका है।
