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राहुल गांधी के ‘अलग कप’ बयान पर उत्तराखंड में विरोध, भाजपा एससी मोर्चा और अंबेडकर मंच ने फूंका पुतला

हल्द्वानी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चाय की दुकानों पर दलितों के लिए अलग डिस्पोजेबल कप रखे जाने संबंधी बयान को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा और अंबेडकर मंच से जुड़े सदस्यों ने प्रदर्शन कर राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी पर दलित समाज के मुद्दों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राहुल गांधी की ओर से दिया गया बयान सामाजिक रूप से संवेदनशील विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर जातिगत भेदभाव की वास्तविक घटना सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी और सामाजिक स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी घटना को दलित अपमान से जोड़ना उचित नहीं है।

प्रदर्शनकारियों ने हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण मामले का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि इस मामले में राहुल गांधी ने बिना पर्याप्त प्रमाण के जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए और दलित समाज के मुद्दे को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक आयोजन से जुड़े विवाद को सीधे दलित सम्मान और जातिगत भेदभाव से जोड़ने से समाज में अनावश्यक भ्रम और तनाव पैदा हो सकता है।

भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा और अंबेडकर मंच के सदस्यों ने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि उनके पास जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों के प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरोपों को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों के आधार पर सामने रखा जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दलित समाज को केवल चुनाव के समय राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल करना बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलित समाज किसी राजनीतिक दल का वोट बैंक नहीं है और न ही उसके सम्मान तथा अधिकारों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सामाजिक समानता और दलित सम्मान का मुद्दा बेहद गंभीर है। ऐसे विषयों पर राजनीतिक दलों और नेताओं को बयान देने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए, ताकि समाज में किसी तरह का विभाजन पैदा न हो।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और उनके बयान पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण तथा माफी की मांग की। उनका कहना था कि यदि बयान के पीछे कोई तथ्य या प्रमाण है तो उसे जनता के सामने रखा जाए, अन्यथा दलित समाज के नाम पर भ्रम और विभाजन की राजनीति से बचा जाए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संविधान और सामाजिक समानता के मूल्यों के अनुरूप समाज में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन किसी भी समुदाय के सम्मान को राजनीतिक संघर्ष का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि दलित समाज के वास्तविक मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय उनके अधिकार, सम्मान और सामाजिक समानता से जुड़े विषयों पर ठोस काम किया जाए।

विरोध प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा उत्तराखंड की सियासत में और गरमाता नजर आ रहा है। भाजपा समर्थित संगठनों ने साफ किया कि राहुल गांधी के बयान को लेकर उनका विरोध आगे भी जारी रह सकता है।


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