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देहरादून। मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान ताइक्वांडो खिलाड़ी सायरा से जुड़ी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वीडियो के आधार पर सरकार और शासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे थे और यह नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही थी कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए छात्रा से डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। लेकिन अब खुद सायरा ने सामने आकर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

सीएनआई इंटर कॉलेज की छात्रा और ताइक्वांडो खिलाड़ी सायरा ने साफ कहा है कि मामला रिश्वत मांगने से जुड़ा नहीं था। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए जरूरी खर्च की समय पर व्यवस्था नहीं हो पाई थी। इसके अलावा उस समय उनके पास पासपोर्ट भी नहीं था। इन्हीं परिस्थितियों के कारण वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकीं।

सायरा ने यह भी कहा कि प्रतियोगिता में जाने और उससे जुड़े खर्च की पूरी जानकारी उन्होंने समय रहते अपने स्कूल और परिजनों को भी नहीं दी थी। ऐसे में वायरल वीडियो के एक हिस्से के आधार पर जिस तरह से पूरे मामले को पेश किया गया, उससे घटनाक्रम का वास्तविक संदर्भ सामने नहीं आ पाया।

सायरा की सफाई सामने आने के बाद अब उस नैरेटिव पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें इस मामले को सीधे सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि सामने रखे बिना उसका एक हिस्सा ही सोशल मीडिया पर क्यों प्रसारित किया गया।

मामले को लेकर राजनीतिक तौर पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की गई। वायरल क्लिप के आधार पर शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला नैरेटिव तेजी से आगे बढ़ाया गया। लेकिन छात्रा ने खुद सामने आकर जो स्थिति स्पष्ट की, उससे यह जरूर सामने आया कि वायरल वीडियो को पूरे संदर्भ में देखना जरूरी था।

अब इस पूरे प्रकरण को कथित तौर पर सरकार और शासन को बदनाम करने की कोशिश से जोड़कर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि किसी साजिश का अंतिम निष्कर्ष जांच और तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है, लेकिन यह जरूर चर्चा का विषय बन गया है कि वीडियो को किस उद्देश्य और किस संदर्भ में वायरल किया गया।

सायरा की सफाई ने सोशल मीडिया पर चल रहे आरोपों की दिशा जरूर बदल दी है। छात्रा के बयान के बाद अब सवाल यह है कि जिस क्लिप के आधार पर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई, उसके पीछे वास्तविक संदर्भ क्या था और उसे इस तरह प्रस्तुत करने की जरूरत क्यों पड़ी।

फिलहाल सायरा के बयान ने पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट कर दिया है कि उनके अनुसार डेढ़ लाख रुपये की बात रिश्वत मांगने से संबंधित नहीं थी। ऐसे में अब जरूरत इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम को तथ्यों के साथ देखा जाए और किसी भी अधूरी वीडियो क्लिप के आधार पर सरकार, शासन या किसी व्यक्ति के खिलाफ निष्कर्ष निकालने से बचा जाए।


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