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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रैक पर हुआ हिमस्खलन हादसा बेहद दर्दनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में फंसे ट्रैकर्स की तलाश के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। इस हादसे में अब तक चार ट्रैकर्स के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के एक ही गांव के चार युवक अभी भी लापता हैं। बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

 

29 अक्टूबर को केदारताल से गंगोत्री लौट रहे ट्रैकिंग दल के सामने अचानक आए हिमस्खलन ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। बर्फ के विशाल हिस्से की चपेट में आने से दल के आठ सदस्य लापता हो गए थे। इनमें पश्चिम बंगाल के पांच ट्रैकर्स, उत्तर प्रदेश की दो महिला ट्रैकर्स और उत्तरकाशी का एक स्थानीय गाइड शामिल था।

 

जानकारी के अनुसार, 12 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। इस दल में सात ट्रैकर्स और पांच सहायक कर्मचारी शामिल थे। 29 अक्टूबर को वापसी के दौरान भोजखड़क और आसपास के क्षेत्र में हिमस्खलन हुआ। इसके बाद आठ सदस्यों से संपर्क टूट गया। वहीं, चार सहायक कर्मचारी किसी तरह सुरक्षित गंगोत्री पहुंचने में कामयाब रहे और उन्होंने प्रशासन को घटना की जानकारी दी।

 

पश्चिम बंगाल के एक ही गांव के चार युवक लापता

 

इस हादसे में पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा जिले के साल्बनी गांव के चार युवक तपस बाउरी (30), रतन घोष (23), रिंटू मंडल (40) और उदय घोष (30) लापता हैं। इनके साथ पड़ोसी गांव केशरा निवासी मनोज खोवास (39) भी लापता है।

 

बताया जा रहा है कि ये सभी युवक पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैकिंग के लिए जा चुके थे। परिजनों के मुताबिक, वे इससे पहले चार बार ट्रैकिंग कर चुके थे। रिंटू मंडल एक फैक्टरी में सुपरवाइजर के पद पर काम करते थे। उनके साथ ट्रैकिंग पर गए कुछ अन्य युवक भी उसी फैक्टरी में कार्यरत थे। सभी छुट्टी लेकर उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में ट्रैकिंग के लिए पहुंचे थे

 

लखनऊ की दो सगी बहनों की दर्दनाक मौत

 

इस हादसे में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रहने वाली दो सगी बहनों दीपिका वर्मा और वर्तिका वर्मा की भी मौत हो गई है। दोनों लंबे समय से ट्रैकिंग की शौकीन थीं। बताया गया कि करीब दो महीने पहले ही उन्होंने चमोली जिले की फूलों की घाटी का ट्रैक पूरा किया था। लेकिन केदारताल की यात्रा उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुई।

 

दोनों बहनों के भाई अतुल वर्मा भी उत्तरकाशी पहुंचे थे। उन्होंने अपनी बहनों के शवों की पहचान की और परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी।

खराब मौसम बना रेस्क्यू अभियान में चुनौती

केदारताल जैसे ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, क्षेत्र में लगातार हो रही बर्फबारी और खराब मौसम के कारण अभियान प्रभावित हो रहा है।

 

बुधवार दोपहर बाद दोबारा बर्फबारी शुरू होने के कारण बचाव अभियान रोकना पड़ा था। अब गुरुवार को चार अन्य लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान फिर शुरू किया जाएगा।

 

जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक चार लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जिनमें लखनऊ की दोनों बहनें शामिल हैं। पश्चिम बंगाल के दो ट्रैकर्स के शव भी बरामद हुए हैं, हालांकि उनकी पहचान की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

 

केदारताल का यह हादसा एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान मौसम की अनिश्चितता और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिन परिवारों के सदस्य पहाड़ों की खूबसूरती देखने निकले थे, वे अब अपने अपनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल प्रशासन और बचाव दल की प्राथमिकता बर्फ में लापता चार लोगों को तलाशना है।


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