उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन प्रदेश की तमाम विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों ने संभावित प्रत्याशियों को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। इस बार चुनावी मैदान में कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। खास बात यह है कि राजनीति में इस बार कुछ ऐसे अधिकारियों के उतरने की भी चर्चाएं हैं, जो वर्तमान में प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या फिर पूर्व में अपनी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर प्रदेश के कुछ चर्चित अधिकारियों पर भी बनी हुई है।
इसी बीच उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक नाम की खूब चर्चा हो रही है। यह नाम है कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वर्तमान निदेशक और आईएफएस अधिकारी साकेत बडोला का। साकेत बडोला को लेकर चर्चाएं हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में यमकेश्वर विधानसभा सीट से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक उनकी ओर से चुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनके संभावित राजनीतिक प्रवेश को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
राजनीतिक परिवार से रहा है साकेत बडोला का जुड़ाव
राजनीतिक जानकारों की मानें तो साकेत बडोला का पारिवारिक जुड़ाव भी राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से पुराना रहा है। बताया जाता है कि उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं और उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में अपना योगदान दिया था। वहीं, उनके मामा कोटद्वार नगरपालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके परिवार का क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव रहा है।
इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि साकेत बडोला के लिए राजनीति कोई बिल्कुल नया क्षेत्र नहीं होगा। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और यदि वह भविष्य में राजनीति का रास्ता चुनते हैं तो उनके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि भी एक आधार बन सकती है।
यमकेश्वर में संभावित उम्मीदवारी को लेकर उत्सुकता
यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में भी साकेत बडोला के नाम को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का मानना है कि यदि क्षेत्र से जुड़ा कोई पढ़ा-लिखा और प्रशासनिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति चुनावी मैदान में उतरता है तो इससे क्षेत्र को एक नया नेतृत्व मिल सकता है।
यमकेश्वर जैसे पहाड़ी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और पलायन जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति यदि जनप्रतिनिधि की भूमिका में आता है तो क्षेत्र की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में काम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि साकेत बडोला चुनाव लड़ने का निर्णय ले चुके हैं या किसी राजनीतिक दल के साथ उनकी कोई बातचीत चल रही है। फिलहाल यह पूरा मामला संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित है।
चुनाव लड़ने के सवाल पर नहीं दिया स्पष्ट जवाब
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जब साकेत बडोला से बातचीत करने की कोशिश की गई और उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने इन संभावनाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिल रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि साकेत बडोला वास्तव में यमकेश्वर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो वह अन्य संभावित प्रत्याशियों के सामने एक मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। इसकी वजह उनका प्रशासनिक अनुभव, स्थानीय क्षेत्र से जुड़ाव और पारिवारिक पृष्ठभूमि मानी जा रही है।
क्या वर्दी छोड़ राजनीति में आएंगे साकेत बडोला?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग की वर्दी में अपनी सेवाएं दे रहे साकेत बडोला आने वाले समय में राजनीति का रुख करेंगे? क्या वह यमकेश्वर विधानसभा से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं? इन सवालों का जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सरकारी सेवा में रहते हुए चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित सेवा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। ऐसे में यदि साकेत बडोला राजनीति में आने का फैसला करते हैं तो उन्हें पहले नियमानुसार अपनी सेवा से अलग होने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
फिलहाल उनकी ओर से न तो चुनाव लड़ने की घोषणा हुई है और न ही किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की पुष्टि हुई है। लेकिन जिस तरह से उनका नाम यमकेश्वर विधानसभा सीट के संभावित चेहरों में चर्चा में आ रहा है, उससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना जरूर है। अब देखना होगा कि साकेत बडोला वन विभाग में अपनी जिम्मेदारी जारी रखते हैं या भविष्य में एक नई भूमिका में जनता के बीच नजर आते हैं।
