बेंगलुरु। हल्द्वानी में सामने आए कथित शुद्धिकरण मामले को लेकर उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट समेत अन्य लोगों के खिलाफ बेंगलुरु में FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम समेत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत की गई है। मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर टी.आर. रामप्पा का नाम दर्ज है, जो खुद को पूर्व उपाध्यक्ष, एसटी विभाग (आदिवासी कांग्रेस), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ा बताते हैं।
शिकायत बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में 31 अगस्त 2026 को दी गई थी। शिकायत में महेंद्र भट्ट को उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बताते हुए उनके खिलाफ संज्ञेय अपराधों के संबंध में FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। शिकायत में भाजपा से जुड़े अन्य लोगों को भी जांच के दौरान उनकी भूमिका के आधार पर आरोपी बनाए जाने की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हल्द्वानी से जुड़े शुद्धिकरण प्रकरण में जाति आधारित भेदभाव और अस्पृश्यता से संबंधित गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं समाज में जातिगत पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने का खतरा पैदा करती हैं। इसी आधार पर मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई।
दस्तावेज में पुलिस से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173 के तहत शिकायत को संज्ञेय अपराध की सूचना मानते हुए तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। साथ ही मामले की तेज, विस्तृत और निष्पक्ष जांच करने तथा वीडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया रिपोर्ट और गवाहों के बयान जैसे संबंधित साक्ष्यों को जांच में शामिल करने की मांग की गई।
शिकायत के साथ उपलब्ध दस्तावेज पर 31 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज है। इसके बाद पुलिस की ओर से की गई हस्तलिखित टिप्पणी में शिकायत प्राप्त होने, कानूनी राय लेने और मामला दर्ज किए जाने का उल्लेख दिखाई देता है। दस्तावेज में विधान सौधा पुलिस स्टेशन में 4 सितंबर 2026 को केस दर्ज किए जाने की जानकारी दर्ज है। हस्तलिखित विवरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(b) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं का उल्लेख भी किया गया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने जांच में पूरा सहयोग करने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी अथवा साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी।
गौरतलब है कि हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर पहले से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस चल रही है। अब बेंगलुरु में FIR दर्ज होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
