बागेश्वर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा की ओर से लगाए गए आरोपों पर अब सियासी विवाद बढ़ गया है। शनिवार को उत्तराखंड सरकार में दर्जा राज्य मंत्री और उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष भूपेश उपाध्याय ने बागेश्वर कोतवाली में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत/तहरीर दी। उन्होंने पुलिस से मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल शिकायत दिए जाने की पुष्टि है।
भूपेश उपाध्याय का आरोप है कि पवन खेड़ा ने हाल के दिनों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर कथित तौर पर गलत और तथ्यहीन आरोप लगाए तथा सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए उन्हें प्रसारित किया। शिकायतकर्ता ने इसे मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की छवि को प्रभावित करने का प्रयास बताया है।
यह विवाद उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट के प्रस्तावित बिजली प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बाद और तेज हुआ है। 17 सितंबर को पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तराखंड सरकार पर परियोजना की प्रक्रिया और टेंडर की शर्तों को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टेंडर की कई शर्तों में बदलाव से अडानी पावर को फायदा पहुंचाने का रास्ता तैयार हुआ।
कांग्रेस के इन आरोपों पर सरकार की ओर से कहा गया है कि बिजली खरीद की प्रक्रिया राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकार का पक्ष है कि अडानी पावर प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। हालांकि, कांग्रेस ने टेंडर की शर्तों में बदलाव, पहले प्रस्तावित UJVNL-THDC परियोजना को आगे न बढ़ाने और 25 साल के बिजली खरीद समझौते को लेकर सवाल उठाए हैं।
भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में पवन खेड़ा के पुराने बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने असम विधानसभा चुनाव के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी को लेकर लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस मामले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इन आरोपों और उनके संदर्भ में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित जांच एजेंसियों के आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्कर्षों को देखना जरूरी होगा।
उधर, कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने उत्तराखंड सरकार पर लगाए गए अपने आरोपों को राजनीतिक सवालों के तौर पर उठाया है। कांग्रेस ने 1,320 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए सरकार से टेंडर प्रक्रिया और बिजली खरीद समझौते को लेकर जवाब मांगा है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तराखंड में बिजली परियोजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव अब कानूनी शिकायत तक पहुंच गया है। एक तरफ भाजपा नेता पवन खेड़ा के बयानों को मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का प्रयास बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस परियोजना की प्रक्रिया और सरकार के फैसलों पर सवाल उठा रही है।
अब पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से यह स्पष्ट होना बाकी है कि पवन खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार बनता है या नहीं।
