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उत्तराखंड में अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों पर चुनाव आयोग की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में बिना पूर्व स्वीकृति किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा।

जानकारी के अनुसार, राज्य में SIR प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बीएलओ मैपिंग और अन्य तैयारियां पिछले कई महीनों से चल रही हैं। 29 मई से इसके लिए प्रशिक्षण शुरू किया गया था, जबकि 8 जून से 7 जुलाई तक SIR प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में यदि बीच प्रक्रिया में उनका तबादला किया जाता है, तो इससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इसी कारण आयोग ने यह व्यवस्था लागू की है कि जिस प्रकार चुनाव आचार संहिता के दौरान तबादलों के लिए अनुमति आवश्यक होती है, उसी प्रकार SIR अवधि में भी किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के स्थानांतरण के लिए आयोग की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। आयोग के पास यह अधिकार भी रहेगा कि वह आवश्यक समझने पर तबादले की अनुमति न दे।

हाल ही में कुछ अधिकारियों के तबादले आयोग की अनुमति प्राप्त करने के बाद ही किए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि SIR प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके।


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