देहरादून/गांधीनगर। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर उत्तराखंड की पहल अब देशभर में उदाहरण बनती नजर आ रही है। उत्तराखंड में कानून लागू होने के बाद अब गुजरात ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘UCC 2026’ बिल को विधानसभा में पारित कर दिया है। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उत्तराखंड मॉडल की चर्चा तेज हो गई है।
गुजरात विधानसभा में करीब सात घंटे तक चली लंबी बहस के बाद यह बिल पास हुआ। राज्य के डिप्टी मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता समाज में समानता और एकरूपता लाने की दिशा में अहम कदम है।
दरअसल, देश में सबसे पहले पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने UCC कानून को पास कर लागू करने की दिशा में पहल की थी। धामी सरकार के इस फैसले को उस समय साहसिक और ऐतिहासिक कदम माना गया था। अब अन्य राज्यों द्वारा इसे अपनाया जाना इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की नीति को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड ने जिस तरह से संवेदनशील विषय पर संतुलित और कानूनी दृष्टिकोण के साथ काम किया, वह अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक साबित हो रहा है। गुजरात द्वारा UCC बिल पारित किया जाना इसी क्रम में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तराखंड सरकार पहले ही कह चुकी है कि UCC का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को लक्षित करना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि इस पहल को “समानता आधारित सुधार” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
अब जब गुजरात ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है, तो आने वाले समय में अन्य राज्यों के भी इसी राह पर चलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उत्तराखंड की यह पहल न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनती जा रही है।
