देहरादून की एक अदालत ने छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश के आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता और उसके पति के बयानों में भारी विरोधाभास है, जिससे अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी अविश्वसनीय हो गई।
मामला एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उसने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसका पति घर नहीं लौटा तो वह रात को आकर उसके साथ दुष्कर्म करेगा। अगली ही रात आरोपी पर जबरदस्ती करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया।
हालांकि, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने पाया कि पीड़िता और उसके पति की गवाही में स्पष्ट अंतर था — खासकर इस बात पर कि घटना के बाद सबसे पहले फोन किसने किया। इसके अलावा, जांच के दौरान महिला पुलिस अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई थी, जिसे अदालत ने प्रक्रिया में गंभीर खामी माना।
अदालत ने कहा कि इतने विरोधाभासी बयानों और लापरवाह जांच के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने 13 अक्टूबर को आरोपी दिनेश कुमार को बरी कर दिया।
