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 रामनगर। ग्राम पूछड़ी इलाके में वर्षों से वन भूमि पर बने अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की इस जमीन पर लंबे समय से लोग अवैध रूप से खेती कर रहे थे। पहले भी वन विभाग ने इन कब्जों को चिह्नित किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठ पाया। मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।

कुछ साल पहले तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने रामनगर नगर पालिका को कूड़ा निस्तारण (ट्रेंचिंग ग्राउंड) के लिए करीब एक हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई थी। इसके बदले नगर पालिका ने वन विभाग को लगभग एक करोड़ रुपये भी दिए थे। बावजूद इसके, आज भी कई लोग इस भूमि पर अवैध रूप से खेती कर रहे हैं, जिससे सरकारी योजना प्रभावित हो रही है।

इसी को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल, वन विभाग की एसडीओ किरण शाह, राजस्व विभाग, पुलिस और नगर पालिका की टीम संयुक्त रूप से मौके पर पहुँची और पूरे क्षेत्र का सर्वे किया। ड्रोन कैमरों की मदद से अवैध कब्जों की पहचान की गई। प्रशासनिक टीम को देखते ही अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया और कुछ लोग अधिकारियों से बहस पर उतर आए।

पहले चरण में नगर पालिका को दी गई ट्रेंचिंग ग्राउंड की भूमि से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों की विस्तृत रणनीतिक बैठक भी हो चुकी है। एएसपी मनोज कुमार कत्याल के अनुसार, वर्ष 2024 में वन भूमि पर कब्जे के मामले में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच जारी है। इसी प्रकरण की गहराई से जांच के लिए सरकार ने एसआईटी भी गठित की है। जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर भोले-भाले लोगों को बेहद कम दाम में जमीन बेच दी।

अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर अवैध कब्जे कब और किस तरह हटाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वन विभाग की लगभग 1,000 हेक्टेयर भूमि पर करीब 500 से अधिक परिवारों ने कब्जा कर रखा है।


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