उत्तराखंड में पेपर लीक मामले में सरकार ने बनाई एस आई टी एक महीने में जांच पूरी कर देनी होगी रिपोर्ट तब तक uksssc द्वारा कराई है परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं होगा,
उत्तराखंड में पिछले दो दिनों से प्रदेश में uksssc द्वारा कराई गई परीक्षा के तीन पेपर लीक होने के बाद हंगामा कटा हुआ है, अब इस मामले में सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है,
पेपर लीक मामले में शासन ने एक बात साफ की हैं कि पेपर लीक नहीं हुआ है ये पेपर केवल दो लोगों के बीच अदान प्रदान किया गया है, इस को लेकर सरकार ने एसआईटी गठित की है जो हाईकोर्ट के रिटायर जज की के निर्देशन में जांच करेगी जिसके लिए सीएम धामी ने महिला पुलिस अधिकारी जया बलूनी पर भरोसा दिखाया जया बलूनी को इस मामले में जांच अधिकारी बनाया गया है,
वहीं इस मामले की जांच एसआईटी को एक महीने में करके सरकार को देनी है,जब तक इस परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले शासन ओर सरकार निष्पक्ष जांच कराने के पक्ष में है इस लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज से जांच कराई जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए
उत्तराखंड में UKSSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं के कथित पेपर लीक मामले ने पिछले दो दिनों से प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर जहां परीक्षार्थियों और विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए, वहीं अब सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का ऐलान कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी। शासन ने साफ किया है कि पेपर का लीक होना साबित नहीं हुआ है, बल्कि यह मामला दो व्यक्तियों के बीच प्रश्नपत्र के अदान-प्रदान तक ही सीमित पाया गया है। इसके बावजूद सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए जांच को गंभीरता से लेने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने महिला पुलिस अधिकारी जया बलूनी पर भरोसा जताते हुए उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उनकी अगुवाई में गठित एसआईटी पूरे मामले की तहकीकात करेगी। खास बात यह है कि इस जांच की निगरानी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे, ताकि किसी भी तरह की पक्षपातपूर्ण स्थिति उत्पन्न न हो और दूध का दूध, पानी का पानी सामने आ सके।
सरकार ने जांच के लिए एक महीने का समय निर्धारित किया है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने जानकारी देते हुए कहा कि जब तक एसआईटी अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपती, तब तक संबंधित परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन और सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार की अनियमितता को उजागर करना और दोषियों को कठोर दंड दिलाना है।
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई बार पेपर लीक प्रकरणों ने सरकार की छवि पर सवाल खड़े किए हैं। इस बार सरकार ने शुरुआत से ही सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री धामी स्वयं इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि समयसीमा में जांच पूरी कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
इस कदम के बाद अब पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। उम्मीदवार भी उम्मीद कर रहे हैं कि सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सके।
