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उत्तराखंड में प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) और शक्ति निर्माण योजना के तहत करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि के गबन का मामला सामने आया है। करीब ₹3.18 करोड़ की वित्तीय अनियमितता को लेकर राज्य सरकार ने अब इस मामले की जांच विशेष जांच टीम (SIT) को सौंप दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसकी अनुमति दे दी है।

करीब दो महीने पहले देहरादून स्थित पीएम पोषण प्रकोष्ठ में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। प्रारंभिक विभागीय जांच में सामने आया कि सरकारी धन के गबन में उपनल (UPNL) के माध्यम से नियुक्त एक तकनीकी कार्मिक की भूमिका प्रत्यक्ष रूप से संदिग्ध पाई गई। वहीं, संबंधित समयावधि में कार्यरत अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है।

मंत्री डॉ. रावत के अनुसार, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच एमआईएस समन्वयक नवीन सिंह रावत, जो कि उपनल से जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) कार्यालय देहरादून में तैनात था, ने अपने तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग कर लगभग ₹3.18 करोड़ की राशि विभिन्न अज्ञात ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर की।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीन सिंह रावत के अलावा अन्य किसी कार्मिक की सीधी संलिप्तता तो प्रमाणित नहीं हुई है, लेकिन इस अवधि में कार्यरत आधा दर्जन जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), वित्त अधिकारी और लेखाधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। ये सभी अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने में विफल पाए गए हैं।

उन पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) अधिनियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने बिना जांच के ही पोषण योजना से जुड़े खातों से बड़ी मात्रा में धनराशि के अवैध ऑनलाइन अंतरण को नजरअंदाज किया।

मंत्री डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि सरकारी धन की हेराफेरी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में वित्तीय और गोपनीय कार्यों की जिम्मेदारी केवल स्थायी, विश्वसनीय और प्रशिक्षित कार्मिकों को ही सौंपी जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


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